शिखर अग्रवाल के बाद पत्नी IPS प्रशाखा माथुर भी APO: 40 विला खरीद मामले में ACB जांच शुरू, पूछताछ की संभावना
राजस्थान के 40 विला खरीद मामले में IAS शिखर अग्रवाल के बाद IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर भी APO। जानिए ACB की प्राथमिक जांच, संपत्ति खरीद के आरोप और मामले से जुड़े अहम सवाल।
राजस्थान में एक निजी कंपनी से कथित तौर पर 40 विला खरीदने और पद का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों से जुड़े मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी और 1995 बैच की IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को भी एपीओ (Awaiting Posting Orders) किए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्मिक विभाग ने प्रशाखा माथुर को एपीओ करने के आदेश जारी किए हैं। वह 24 अक्टूबर 2025 से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG), प्लानिंग, मॉडर्नाइजेशन एंड वेलफेयर के पद पर कार्यरत थीं। इससे पहले 29 अक्टूबर की रात राजस्थान सरकार ने शिखर अग्रवाल को उनके पदों से हटाकर एपीओ कर दिया था। मामले में राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने प्राथमिक जांच यानी प्रिलिमिनरी इंक्वायरी (PE) दर्ज कर जांच शुरू करने की जानकारी दी है।
आरोप है कि शिखर अग्रवाल ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया और उसी कंपनी से अपने तथा परिजनों के नाम पर कथित तौर पर रियायती कीमतों पर संपत्तियां खरीदीं। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी बताई गई है। किसी अधिकारी या कंपनी के खिलाफ दोष सिद्ध होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
शिखर अग्रवाल के बाद प्रशाखा माथुर पर प्रशासनिक कार्रवाई
विला खरीद मामले में सबसे पहले वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की गई। 29 अक्टूबर की रात उन्हें पदों से हटाकर एपीओ कर दिया गया। इसके बाद एसीबी ने मामले में प्राथमिक जांच दर्ज की। अब उनकी पत्नी और वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर को भी एपीओ किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशाखा माथुर लंबे समय से राजस्थान पुलिस में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रही हैं। उनका नाम भी उन संपत्तियों की खरीद से जुड़ा बताया गया है, जिनकी जांच एसीबी कर रही है। एपीओ किया जाना प्रशासनिक कार्रवाई है। इसे अपने आप में किसी आपराधिक आरोप के सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
प्रशाखा माथुर के नाम पर भी विला खरीदने का दावा
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, जिस निजी कंपनी से शिखर अग्रवाल ने कथित तौर पर विला खरीदे, उसी कंपनी से प्रशाखा माथुर के नाम पर भी संपत्तियां खरीदी गई थीं। आरोपों के मुताबिक, उदयपुर और अलवर में स्थित अनंता रिसॉर्ट से जुड़ी संपत्तियों की खरीद में शिखर अग्रवाल के अलावा उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी सामने आए हैं। कुछ संपत्तियों का उल्लेख प्रशाखा माथुर के वार्षिक अचल संपत्ति विवरण में होने की बात कही गई है। वहीं, अलवर में कथित रूप से खरीदी गई संपत्तियों का विवरण उनके प्रॉपर्टी रिटर्न में दर्ज नहीं होने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, इन संपत्ति विवरणों, खरीद की तारीखों और घोषित संपत्तियों के बीच अंतर की आधिकारिक जांच आवश्यक है।
क्या प्रशाखा माथुर से भी पूछताछ कर सकती है ACB?
शिखर अग्रवाल के खिलाफ प्राथमिक जांच शुरू होने के बाद प्रशाखा माथुर की भूमिका की जांच होने की संभावना जताई जा रही है। यदि जांच के दौरान संपत्तियों की खरीद, भुगतान, संपत्ति विवरण या अन्य लेनदेन से संबंधित स्पष्टीकरण की जरूरत होती है, तो एसीबी उनसे पूछताछ कर सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि एसीबी ने प्रशाखा माथुर को पूछताछ के लिए कोई नोटिस जारी किया है या नहीं। जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई उपलब्ध दस्तावेजों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
40 विला खरीद का मामला क्या है?
मामले में सबसे गंभीर आरोप एक निजी कंपनी से बड़ी संख्या में विला खरीदने और उसी कंपनी को सरकारी स्तर पर कथित अनुचित लाभ पहुंचाने से जुड़े हैं। आरोपों के अनुसार, शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर उदयपुर तथा अलवर में स्थित अनंता रिसॉर्ट से संबंधित कुल 40 विला की खरीद की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों की खरीद निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी बताई गई है। कंपनी का संबंध अनंता नाम से संचालित होटल और रिसॉर्ट कारोबार से बताया गया है। जांच का प्रमुख विषय यह है कि क्या इन संपत्तियों की खरीद बाजार मूल्य से कम कीमत पर हुई और क्या इसके बदले संबंधित कंपनी को सरकारी फैसलों में कोई अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
उदयपुर में पति-पत्नी के नाम पर 20 विला खरीदने का दावा
मामले से जुड़े विवरण के अनुसार, उदयपुर के बुझड़ा क्षेत्र स्थित अनंता रिसॉर्ट में कुल 20 विला खरीदे जाने का दावा किया गया है। इनमें से 10 विला शिखर अग्रवाल और 10 विला उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर के नाम पर बताए गए हैं। प्रत्येक विला की कथित खरीद कीमत लगभग 15 लाख रुपए बताई गई है। इस आधार पर उदयपुर की इन 20 संपत्तियों की कुल घोषित खरीद कीमत लगभग 3 करोड़ रुपए बनती है। हालांकि, वास्तविक भुगतान, रजिस्ट्री विवरण और बाजार मूल्य की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की जांच से ही हो सकेगी।
अलवर के अजबगढ़ में भी परिवार के नाम संपत्तियां
उदयपुर के अलावा अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट से जुड़ी संपत्तियों की खरीद का भी दावा किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यहां कुल 20 विला परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर खरीदे जाने की बात कही गई है।
इनमें कथित रूप से
• शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम पर कुल 8 विला, प्रत्येक लगभग 16.5 लाख रुपए में।
• दोनों बेटों के नाम पर कुल 4 विला, प्रत्येक लगभग 15 लाख रुपए में।
• परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर कुल 4 विला, प्रत्येक लगभग 16.5 लाख रुपए में।
खरीद का यह विवरण कुल 16 विला का हिसाब देता है, जबकि दावा 20 विला का किया गया है। इसलिए अलवर की शेष चार संपत्तियों के स्वामित्व और खरीद विवरण की पुष्टि आवश्यक है।
आरोप है कि इन संपत्तियों को बाजार मूल्य की तुलना में कम कीमत पर खरीदा गया। हालांकि, बाजार मूल्य और वास्तविक खरीद कीमत के अंतर का निष्कर्ष स्वतंत्र मूल्यांकन तथा रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
कंपनी को सरकारी शर्तों में अनुचित छूट देने का आरोप
शिखर अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने राजस्थान सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। उनकी पूर्व जिम्मेदारियों में उदयपुर जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के पद शामिल रहे हैं। आरोपों के मुताबिक, संबंधित कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण से जुड़ी शर्तों में छूट दिलाने, आवश्यक प्रमाण-पत्रों की पर्याप्त जांच के बिना स्वीकृतियां देने और विशेष आर्थिक रियायतें दिलाने में पद का कथित दुरुपयोग किया गया। जांच में यह पता लगाया जाना है कि क्या इन फैसलों से संबंधित कंपनी को नियमों के विरुद्ध लाभ मिला और क्या इससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।
27 मार्च को आर्थिक पैकेज और विला रजिस्ट्री का दावा
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में 27 मार्च 2026 की तारीख का जिक्र किया गया है।
आरोपों के अनुसार, इसी तारीख को वित्त विभाग की ओर से संबंधित निजी कंपनी के लिए विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया गया। दावा है कि उसी दिन शिखर अग्रवाल और उनके परिवार से जुड़ी 20 विला की रजिस्ट्री भी करवाई गई। यदि दोनों घटनाओं की तारीखें आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्ट होती हैं, तो जांच एजेंसी इनके बीच किसी संभावित संबंध की पड़ताल कर सकती है। हालांकि, दो अलग-अलग लेनदेन एक ही तारीख को होने से अपने आप में आपराधिक मिलीभगत सिद्ध नहीं होती। इसके लिए निर्णय प्रक्रिया, दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच जरूरी होगी।
एसीबी ने प्राथमिक जांच दर्ज की
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30 अक्टूबर को एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से मुलाकात की। मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को लागू करने के विषय पर चर्चा का उल्लेख किया। इसके बाद शिखर अग्रवाल से जुड़े मामले में एसीबी की प्राथमिक जांच दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, मुख्य सचिव और एसीबी महानिदेशक की बैठक में इस विशेष मामले पर क्या बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
क्या है ACB की प्राथमिक जांच यानी PE?
भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में प्राथमिक जांच का उद्देश्य उपलब्ध शिकायतों, दस्तावेजों और आरोपों की प्रारंभिक पड़ताल करना होता है। इस दौरान जांच एजेंसी संपत्ति खरीद, वित्तीय लेनदेन, सरकारी स्वीकृतियों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों से जानकारी भी ली जा सकती है। प्राथमिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जा सकता है। PE दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो गए हैं।
कौन हैं IPS प्रशाखा माथुर?
डॉ. प्रशाखा माथुर राजस्थान कैडर की 1995 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं। उनका संबंध अजमेर से बताया जाता है। उन्होंने MBBS की पढ़ाई करने के बाद सिविल सेवा में प्रवेश किया। अपने पुलिस सेवा करियर में वह राजस्थान के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रही हैं। वह जोधपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा और पाली में पुलिस अधीक्षक के पद पर सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भी काम किया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 2009 से 2014 के बीच वह इंटेलिजेंस ब्यूरो में अतिरिक्त उपनिदेशक और उपनिदेशक जैसे पदों पर कार्यरत रहीं। 24 अक्टूबर 2025 से वह राजस्थान पुलिस में एडीजी, प्लानिंग, मॉडर्नाइजेशन एंड वेलफेयर के पद पर थीं।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
इस मामले में जांच का केंद्र केवल संपत्तियों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी खरीद और संबंधित सरकारी निर्णयों के बीच किसी संभावित संबंध का पता लगाना होगा। प्रमुख सवाल हैं…
पहला: क्या शिखर अग्रवाल और उनके परिवार से जुड़े लोगों ने वास्तव में संबंधित कंपनी से 40 विला खरीदे?
दूसरा: क्या संपत्तियों की खरीद कीमत उस समय के बाजार मूल्य से असामान्य रूप से कम थी?
तीसरा: क्या संबंधित कंपनी को सरकारी स्वीकृतियों या आर्थिक पैकेज में नियमों के विरुद्ध लाभ दिया गया?
चौथा: क्या सरकारी फैसलों और निजी संपत्ति खरीद के बीच किसी अनुचित लेनदेन या हितों के टकराव के प्रमाण मौजूद हैं?
पांचवां: क्या खरीदी गई सभी संपत्तियों का विवरण संबंधित अधिकारियों के अनिवार्य संपत्ति विवरण में दर्ज किया गया था?
छठा: क्या इन लेनदेन में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी बनती है?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के मामले में आगे क्या?
शिखर अग्रवाल के बाद प्रशाखा माथुर को एपीओ किए जाने से यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एसीबी की प्राथमिक जांच में अब संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेजों, सरकारी निर्णयों और संभावित हितों के टकराव की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों और संपत्ति खरीद से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी देखी जा सकती है। हालांकि, अभी जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। इसलिए शिखर अग्रवाल, प्रशाखा माथुर या संबंधित कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। आने वाले समय में एसीबी की जांच और राजस्थान सरकार की अगली प्रशासनिक कार्रवाई से इस मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।

