राजस्थान के 6 जिलों में दिवाली पर पटाखों को लेकर सख्ती, 7 और 8 नवंबर को ही मिलेगी 3 घंटे की छूट

राजस्थान के NCR के छह जिलों में दिवाली पर सिर्फ 7 और 8 नवंबर को ग्रीन पटाखे चलाने की छूट होगी। जानें आतिशबाजी का समय, QR कोड और पटाखों से जुड़े सभी नियम।

राजस्थान के 6 जिलों में दिवाली पर पटाखों को लेकर सख्ती, 7 और 8 नवंबर को ही मिलेगी 3 घंटे की छूट

दिवाली पर आतिशबाजी करने की तैयारी कर रहे लोगों को इस बार सरकार की गाइडलाइन का खास ध्यान रखना होगा। राजस्थान सरकार ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल प्रदेश के छह जिलों में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम जारी किए हैं। इन जिलों में अब पूरे त्योहार के दौरान पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि केवल दो दिन और निर्धारित समय के भीतर ही आतिशबाजी की जा सकेगी। इतना ही नहीं, इन दो दिनों में भी सिर्फ प्रमाणित ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति होगी।

राजस्थान के इन 6 जिलों में लागू होंगे नियम

सरकार की नई गाइडलाइन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल राजस्थान के छह जिलों पर लागू होगी। इनमें अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ शामिल हैं। इन सभी जिलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल को लेकर विशेष पाबंदियां लगाई गई हैं। सरकार का उद्देश्य दिवाली के दौरान आतिशबाजी से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

7 और 8 नवंबर को ही चला सकेंगे पटाखे

गाइडलाइन के मुताबिक, इन छह जिलों में 6 नवंबर तक पटाखे चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद 7 और 8 नवंबर को ही सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे चलाने की छूट दी जाएगी। इसके लिए दो समय निर्धारित किए गए हैं। सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही आतिशबाजी की जा सकेगी। यानी रोजाना कुल तीन घंटे पटाखे चलाने की अनुमति होगी। 9 नवंबर से एक बार फिर पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा। निर्धारित समय के अलावा पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।

केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की अनुमति

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन जिलों में सामान्य पटाखों के बजाय केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। अन्य तरह के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर रोक रहेगी। बेरियम युक्त पटाखों और पटाखों की लड़ियों पर भी प्रतिबंध रहेगा। ऐसे में दुकानदारों को भी केवल निर्धारित नियमों के अनुरूप पटाखे बेचने होंगे।

 QR कोड स्कैन करने के बाद ही खरीदें पटाखे

ग्रीन पटाखों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रत्येक पैकेट पर उत्पाद-विशिष्ट QR कोड अनिवार्य किया है। इस कोड को मोबाइल से स्कैन करने पर निर्माता, प्रमाणन और लाइसेंस से जुड़ी जानकारी मिल सकेगी। बिना QR कोड वाले पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। पटाखे केवल अधिकृत और निर्धारित दुकानों से ही खरीदे जा सकेंगे। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पटाखों की बिक्री पर भी रोक रहेगी।

अस्पताल और स्कूलों के 300 मीटर दायरे में आतिशबाजी पर रोक

सरकार ने मरीजों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ स्थानों को शांत क्षेत्र घोषित किया है। इसके तहत अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। इन स्थानों पर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को दी गई है।

अवैध पटाखों की बिक्री और भंडारण पर होगी कार्रवाई

प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री, भंडारण और सप्लाई रोकने के लिए जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विशेष निगरानी और गश्ती टीमें बनाई जाएंगी। ये टीमें पटाखों की दुकानों और गोदामों की जांच करेंगी, ताकि प्रतिबंधित पटाखों का स्टॉक या अवैध सप्लाई पकड़ी जा सके। दिल्ली-एनसीआर से आने वाले वाहनों की भी जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पटाखे जब्त करने के साथ संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

दिवाली के दौरान रोजाना जांचा जाएगा प्रदूषण का स्तर

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और संबंधित जिला कार्यालयों को दिवाली के दौरान तथा उसके बाद वायु प्रदूषण के स्तर की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए रोजाना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले लोगों, दुकानदारों और पटाखा निर्माताओं के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की इस गाइडलाइन के तहत प्रशासन को पटाखों की बिक्री से लेकर उनके इस्तेमाल तक निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ के लोगों को दिवाली पर आतिशबाजी से पहले तारीख, समय और पटाखों के प्रमाणन से जुड़े नियमों का ध्यान रखना होगा।