राहुल के टेस्ट में डोटासरा फेल या पास, राजस्थान कांग्रेस में गेम हो गया
रितु बराला मामले में राजस्थान कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जयपुर कमिश्नरेट के धरने, एफआईआर की मांग और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा व कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगे जा रहे हैं।
रितु बराला को कांग्रेस ने देश की शेरनी बनाया ...या फिर कांग्रेस के लिए राजनीतिक लाभ उठाने के लिए मेमना .....सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जो राजस्थान कांग्रेस 19 अक्टूबर के बाद जयपुर कमिश्नरेट पर धरने पर बैठी थी और FIR ना होने तक उठने का नाम नहीं ले रही थी ...वो कांग्रेस अब ऋतु बराला को भूल चुकी है और शायद यही कांग्रेस में होता है ...सोचिए जरा कुछ सवाल हैं ...जो वर्तमान राजस्थान कांग्रेस से पूछे जाने चाहिए
सवाल - 01 - रितु बराला की FIR के लिए अभी तक कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया
सवाल - 02 - कमिश्नरेट से मिले लेटर के बाद कांग्रेस ने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया
सवाल - 03 - बीते 4 दिनों से कांग्रेस ने रितु बरारा को लेकर कोई बयान क्यों नहीं दिया
सवाल - 04 - क्या रितु बराला के मामले में कांग्रेस सिर्फ ऱाजनीतिक फायदा उठाना चाहती थी
सवाल - 05 - क्या रितु बराला के मामले में कांग्रेस फेल हो गई, इसलिए चुप है
ये हर सवाल गंभीर है ....क्योंकि दिल्ली से जब राहुल गांधी ने गोविंद डोटासरो को फोन कर राजस्थान में FIR कराने के लिए फोन किया था ....सवाल तभी से उठ रहा था कि जब दिल्ली में परिवाद दर्ज है तो फिर राजस्थान में ZERO FIR कैसे होगी ...तो क्या राहुल गांधी ने कानून राय नहीं ली थी ...फोन करने से पहले ....उसके बाद जब डोटासरा ने कमिश्नेट का घेराव किया ..धरना दिया ...क्या डोटासरा ने भी कानून राय नहीं ली थी कि ZERO FIR हो सकती है या नहीं .....सवाल ये भी है कि उनके साथ टीकाराम जूली थी ...3 बार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे ...क्या उनको भी जानकारी नहीं थी ...या फिर ये पूरे तरीके से राजनीति स्टंट था ...जिसमें मकसद ऋतु बराला को इंसाफ दिलाना नहीं बल्कि राजस्थान के गांव की बेटी की तरफ ऋतु को दिखाकर गांव के चुनाव में कांग्रेस को फायदा पहुंचाने का मकसद था ...और पंचायत चुनाव में ये संदेश देना कि देखिए बीजेपी राज में बेटियों की FIR भी दर्ज नहीं होती ....
और जब चुनाव शुरु हो गए तो कांग्रेस ऋतु बराला को भूल गई ...हो सकता है कि वो कोर्ट का दरवाजा खटखटाए ...लेकिन ये देरी क्यों और सवाल ये भी है कि जब मामला दिल्ली में हुआ और दिल्ली में राहुल गांधी खुद नेता प्रतिपक्ष हैं ...तो फिर उन्होंने रितु बराला को इंसाफ दिलाने की जिम्मेदारी राजस्थान कांग्रेस को क्यों दी ...क्या राजस्थान की बेटी को इँसाफ दिलाने से ज्यादा जरूरी राहुल गांधी के लिए वियतनाम घूमना है ....ये वो सवाल हैं जो कांग्रेस पर उठ रहे हैं .....हालांकि सवाल ये भी है कि क्या रितु बराला के साथ दिल्ली में गलत हुआ ...जो वीडियो सामने आए ...रितु बराला के साथ मारपीट हुई ...क्या उसको रोका जा सकता था...टाला जा सकता था और क्या प्रदर्शन करने के दौरान देश की बेटियों के साथ चाहे वो राजनीतिक ही क्यों ना हो ...बर्बरता की जा सकती है ....हालांकि रितु बराला ने भी पुलिसकर्मी के साथ बदलसुली की थी ..हाथ उठाया था .....
लेकिन हमारा सवाल ये है क्या राजस्थान कांग्रेस राहुल गांधी के चक्रव्यूह में फंस गई या फिर राहुल गांधी के दिए गए टास्क में फेल हो गई ...ये राजस्थान कांग्रेस खासकर डोटासरा जी को तय करना है ....लेकिन सच यही है कि राजस्थान कांग्रेस ऋतु बराला के साथ खड़ी होकर भी खड़ी नजर नहीं आ रही और ये राजस्थान की जनता को नजर आ रहा है अब जनता के बीच में संदेश क्या गया है ....
नम्बर 1 - कांग्रेस ने रितु बराला का राजनीतिक फायदा उठाया
नम्बर 2 - बीजेपी राज में बेटियों को इंसाफ नहीं मिल रहा ....
ये जनता को तय करना है और चुनाव परिणाम काफी हद तक इसको तय करेंगे इसलिए पंचायत चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है .......

