CJI बोले न्यायपालिका को रहना होगा और सजग

जयपुर में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायपालिका और उससे जुड़ी संस्थाओं को अधिक सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की जनता का न्याय व्यवस्था पर गहरा विश्वास है और इसे बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।सीजेआई जयपुर के कॉन्सिट्यूशन क्लब में आयोजित ‘द बेंच बियॉन्ड रिटायरमेंट’ कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज ऑफ सुप्रीम कोर्ट एंड हाईकोर्ट्स ऑफ इंडिया और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की ओर से आयोजित किया गया।अपने संबोधन के दौरान सीजेआई ने दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियां भी बोली....

वो आदमी नहीं है, मुकम्मल बयान है

माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है

सामान कुछ नहीं है, फटे-हाल है मगर

झोले में उसके पास कोई संविधान है

उस सर-फिरे को यूं नहीं बहला सकेंगे आप

वो आदमी नया है, मगर सावधान है'

इन पंक्तियों को न्यायपालिका के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि यदि न्यायाधीश इन भावनाओं को समझें और अपनाएं, तो जनता का विश्वास न केवल कायम रहेगा बल्कि और मजबूत होगा....सीजेआई ने रिटायर्ड जजों की भूमिका को खास बताते हुए उन्हें ‘बावड़ी’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि जैसे राजस्थान में बावड़ियां बारिश का पानी संचित कर संकट के समय लोगों की प्यास बुझाती हैं, उसी तरह अनुभवी और सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी न्याय व्यवस्था के लिए अमूल्य स्रोत हैं। जटिल परिस्थितियों में उनका अनुभव मार्गदर्शन देता है और न्यायपालिका को मजबूती प्रदान करता है।कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के 46 जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को मल्टी यूटिलिटी व्हीकल भी वितरित किए गए।वहीं, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि समाज न्यायपालिका का अनुसरण करता है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के शब्द समाज के लिए मार्गदर्शन बन जाते हैं और उनके निर्णय सामाजिक बदलाव की नींव रखते हैं।